श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.35.16 
आम्रं छित्त्वा कुठारेण निम्बं परिचरेत् तु क:।
यश्चैनं पयसा सिञ्चेन्नैवास्य मधुरो भवेत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'कुल्हाड़ी से आम को कौन काटेगा और उसकी जगह नीम कौन खाएगा? जो नीम को आम के स्थान पर दूध से सींचता है, उसके लिए भी यह नीम मीठा फल नहीं देगा (अतः वरदान के बहाने राम को वनवास भेजकर कैकेयी के हृदय को संतुष्ट करना राजा के लिए कभी भी सुखद परिणाम का कारण नहीं हो सकता)॥16॥
 
‘Who will chop a mango with an axe and eat neem instead? Even for the one who waters neem with milk instead of mango, this neem will not give sweet fruit (so satisfying Kaikeyi's heart by sending Rama to exile on the pretext of a boon can never be the cause of pleasant result for the king)॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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