श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.35.14 
आश्चर्यमिव पश्यामि यस्यास्ते वृत्तमीदृशम्।
आचरन्त्या न विवृता सद्यो भवति मेदिनी॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'मैं यह देखकर आश्चर्यचकित हूँ कि तुम्हारे इतने महान् अत्याचार करने पर भी पृथ्वी तुरन्त नहीं फटती।॥14॥
 
'I am astonished to see that despite your committing such great atrocities, the Earth does not explode immediately.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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