श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 35: सुमन्त्र के समझाने और फटकारने पर भी कैकेयी का टस-से-मस न होना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  2.35.11-12h 
न च ते विषये कश्चिद् ब्राह्मणो वस्तुमर्हति।
तादृशं त्वममर्यादमद्य कर्म करिष्यसि॥ ११॥
नूनं सर्वे गमिष्यामो मार्गं रामनिषेवितम्।
 
 
अनुवाद
'तुम्हारे राज्य में कोई ब्राह्मण निवास नहीं करेगा। यदि तुम आज ऐसा अभद्र कार्य करोगे, तो निश्चय ही हम सब लोग उसी मार्ग का अनुसरण करेंगे जिस पर भगवान राम चले हैं॥ 11 1/2॥
 
'No Brahmin will reside in your kingdom. If you commit such an indecorous act today, then surely we all will follow the same path which Lord Rama has followed.॥ 11 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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