श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.34.9 
स सत्यवाक्यो धर्मात्मा गाम्भीर्यात् सागरोपम:।
आकाश इव निष्पङ्को नरेन्द्र: प्रत्युवाच तम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर समुद्र के समान अगाध और आकाश के समान निर्मल तथा सत्यनिष्ठ एवं सदाचारी राजा दशरथ ने उसे उत्तर दिया-॥9॥
 
On hearing this, King Dasaratha, who was as deep as the ocean and as clear as the sky and who was a truthful and virtuous person, answered him -॥ 9॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas