श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  2.34.60 
एवं स राजा व्यसनाभिपन्न-
स्तापेन दु:खेन च पीडॺमान:।
आलिङ्गॺ पुत्रं सुविनष्टसंज्ञो
भूमिं गतो नैव चिचेष्ट किंचित्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
श्री राम की यह बात सुनकर पुत्र वियोग के शोक में व्याकुल राजा दशरथ ने दुःख और वेदना से व्याकुल होकर उन्हें हृदय से लगा लिया और फिर मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े। उस समय उनका शरीर जड़वत हो गया और उसमें कोई हलचल नहीं हो रही थी।
 
On hearing Shri Ram say this, King Dasharath, who was in the trouble of losing his son, embraced him in grief and anguish and then fell unconscious on the ground. At that time his body was like a still body and could not move at all. 60.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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