सर्वप्रथम सूत सुमन्त्र ने विजयसूचक आशीर्वाद देकर महाराज की समृद्धि की कामना की; तत्पश्चात् भय से व्याकुल होकर कोमल एवं मधुर वाणी में यह कहा- ॥5॥
First of all, Suta Sumantra gave blessings indicating victory and wished for the prosperity of the Maharaja; Then, distraught with fear, he said this in a soft and sweet voice - 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥