श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.34.47 
नैवाहं राज्यमिच्छामि न सुखं न च मेदिनीम्।
नैव सर्वानिमान् कामान् न स्वर्गं न च जीवितुम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
मैं न तो इस राज्य को चाहता हूँ, न सुख को, न पृथ्वी को, न इन सब भोगों को, न स्वर्ग को, न जीवन को।॥47॥
 
‘I do not desire this kingdom, nor happiness, nor the earth, nor all these pleasures, nor heaven, nor even life.॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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