श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.34.38 
न चैतदाश्चर्यतमं यत् त्वं ज्येष्ठ: सुतो मम।
अपानृतकथं पुत्र पितरं कर्तुमिच्छसि॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्र! तुम अपने पिता को सत्यवादी बनाना चाहते हो। इसमें तुम्हारे लिए विशेष आश्चर्य की बात नहीं है; क्योंकि गुण और आयु दोनों दृष्टि से तुम मेरे ज्येष्ठ पुत्र हो।’ ॥38॥
 
‘Son! You want to make your father truthful. This is not a matter of much surprise for you; because you are my eldest son in terms of both qualities and age.' ॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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