श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.34.28 
भवान् वर्षसहस्राय पृथिव्या नृपते पति:।
अहं त्वरण्ये वत्स्यामि न मे राज्यस्य कांक्षिता॥ २८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आप हजारों वर्षों तक इस पृथ्वी के शासक बने रहें। अब मैं वन में रहूँगा। मैं राज्य नहीं लेना चाहता।॥28॥
 
‘Maharaj! May you remain the ruler of this earth for thousands of years. I will now live in the forest. I do not wish to take over the kingdom.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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