श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.34.21 
अथ रामो मुहूर्तस्य लब्धसंज्ञं महीपतिम्।
उवाच प्राञ्जलिर्बाष्पशोकार्णवपरिप्लुतम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
शोक के आँसुओं के सागर में डूबे हुए राजा दशरथ जब दो घड़ी के बाद होश में आए, तब श्री राम ने हाथ जोड़कर उनसे कहा-॥21॥
 
When King Dasharatha, who was drowned in the ocean of tears of grief, regained consciousness after two hours, then Shri Ram folded his hands and said to him -॥ 21॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas