श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.34.17 
सोऽभिदुद्राव वेगेन रामं दृष्ट्वा विशाम्पति:।
तमसम्प्राप्य दु:खार्त: पपात भुवि मूर्च्छित:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजा ने प्रजापालक श्री रामजी को देखते ही बड़े वेग से उनकी ओर दौड़ा, किन्तु उनके पास पहुँचने से पहले ही वह शोक से व्याकुल होकर भूमि पर गिर पड़ा और मूर्छित हो गया॥17॥
 
As soon as the King saw Sri Rama, the protector of his subjects, he ran towards him with great speed, but before he could reach him, he fell down on the ground, overwhelmed with grief, and became unconscious.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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