श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.34.14 
आगतेषु च दारेषु समवेक्ष्य महीपति:।
उवाच राजा तं सूतं सुमन्त्रानय मे सुतम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उन सबको आते देख पृथ्वी के स्वामी राजा दशरथ ने सारथि से कहा - 'सुमन्त्र! अब मेरे पुत्र को लौटा लाओ।'
 
Seeing them all arriving, King Dasharatha, the lord of the earth, said to the charioteer - 'Sumantra! Now bring my son back.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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