श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.34.12 
एवमुक्ता: स्त्रिय: सर्वा: सुमन्त्रेण नृपाज्ञया।
प्रचक्रमुस्तद् भवनं भर्तुराज्ञाय शासनम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजा की आज्ञा से जब सुमन्तराम ने ऐसा कहा, तब सब रानियाँ उसे अपने स्वामी की आज्ञा समझकर उस महल की ओर चल पड़ीं ॥12॥
 
When Sumantram said this by the king's order, all the queens took it as their master's order and proceeded towards that palace. ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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