श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 34: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिये विदा माँगना, राजा का शोक और मूर्छा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.34.10 
सुमन्त्रानय मे दारान् ये केचिदिह मामका:।
दारै: परिवृत: सर्वैर्द्रष्टुमिच्छामि राघवम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सुमन्त्र! मेरी सब पत्नियों को यहाँ बुलाओ। मैं उन सबके साथ श्री राम का दर्शन करना चाहता हूँ।॥10॥
 
‘Sumantra! Call all my wives here. I want to see Shri Ram with all of them.’॥10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas