धर्मवत्सल श्री रामचन्द्रजी, जो पिता की आज्ञा के अनुसार वन में प्रवेश करने का बुद्धिपूर्वक निर्णय करके आए थे, सुमन्त्र की ओर देखकर बोले- ‘महाराज को मेरे आगमन की सूचना दीजिए।’ 31॥
Dharmavatsal Shri Ramchandraji, who had come with a wise decision to enter the forest as per his father's orders, looked at Sumantra and said - 'Please inform Maharaj about my arrival.' 31॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे त्रयस्त्रिंश: सर्ग:॥ ३३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें तैंतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥