श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 33: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का दुःखी नगरवासियों के मुख से तरह की बातें सुनते हुए पिता के दर्शन के लिये कैकेयी के महल में जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.33.23 
बिलानि दंष्ट्रिण: सर्वे सानूनि मृगपक्षिण:।
त्यजन्त्वस्मद्भयाद्भीता गजा: सिंहा वनान्यपि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘वन में सर्प हमारे भय से अपने बिल छोड़कर भाग जाएँ। पर्वतों पर रहने वाले मृग और पक्षी भी उसकी चोटियों को छोड़कर दूर चले जाएँ तथा हाथी और सिंह भी उस वन को छोड़कर दूर चले जाएँ॥ 23॥
 
‘In the forest, the snakes should leave their burrows and run away out of fear of us. The deer and birds living on the mountains should leave its peaks and even the elephants and lions should leave those forests and go far away.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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