श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 33: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का दुःखी नगरवासियों के मुख से तरह की बातें सुनते हुए पिता के दर्शन के लिये कैकेयी के महल में जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.33.22 
वनं नगरमेवास्तु येन गच्छति राघव:।
अस्माभिश्च परित्यक्तं पुरं सम्पद्यतां वनम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'जिस वन में श्री राम जा रहे हैं, वह नगर बन जाए और जब हम वहाँ से चले जाएँ, तो वह नगर भी वन बन जाए। ॥ 22॥
 
'The forest where Sri Rama is heading to should become a city, and when we leave it, this city should also turn into a forest. ॥ 22॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd