श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 33: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का दुःखी नगरवासियों के मुख से तरह की बातें सुनते हुए पिता के दर्शन के लिये कैकेयी के महल में जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.33.17 
उद्यानानि परित्यज्य क्षेत्राणि च गृहाणि च।
एकदु:खसुखा राममनुगच्छाम धार्मिकम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अपने सब बाग-बगीचे, घर-बार और खेत-खलिहान छोड़कर धर्मात्मा श्री राम का अनुसरण करो। उनके सुख-दुःख में उनके साथी बनो॥17॥
 
‘Leave all your gardens, houses and farms and follow the virtuous Shri Ram. Become his companion in his joys and sorrows.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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