श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 33: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का दुःखी नगरवासियों के मुख से तरह की बातें सुनते हुए पिता के दर्शन के लिये कैकेयी के महल में जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.33.15 
मूलं ह्येष मनुष्याणां धर्मसारो महाद्युति:।
पुष्पं फलं च पत्रं च शाखाश्चास्येतरे जना:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ये महान् एवं यशस्वी श्री राम ही समस्त मनुष्यों के मूल हैं, धर्म ही उनका बल है। संसार के अन्य प्राणी तो पत्ते, फूल, फल और शाखाएँ हैं।॥15॥
 
‘This great and illustrious Shri Ram is the root of all human beings, Dharma is their strength. The other creatures in the world are the leaves, flowers, fruits and branches.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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