श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 33: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का दुःखी नगरवासियों के मुख से तरह की बातें सुनते हुए पिता के दर्शन के लिये कैकेयी के महल में जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.33.14 
पीडया पीडितं सर्वं जगदस्य जगत्पते:।
मूलस्येवोपघातेन वृक्ष: पुष्पफलोपग:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'जैसे जड़ कट जाने पर वृक्ष अपने फल-फूलों सहित सूख जाता है, वैसे ही जगत के स्वामी श्री रामजी के दुःख से सारा जगत दुःखी है।॥14॥
 
'The entire world is grieved by the suffering of this Lord of the Universe, Shri Ram, just as a tree, including its flowers and fruits, dries up when its roots are cut off.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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