श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 33: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का दुःखी नगरवासियों के मुख से तरह की बातें सुनते हुए पिता के दर्शन के लिये कैकेयी के महल में जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.33.13 
तस्मात् तस्योपघातेन प्रजा: परमपीडिता:।
औदकानीव सत्त्वानि ग्रीष्मे सलिलसंक्षयात्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'अतः उन पर आक्रमण करके तथा उनके राज्याभिषेक में बाधा डालकर प्रजा को उसी प्रकार महान् कष्ट हुआ है, जिस प्रकार ग्रीष्म ऋतु में तालाब का जल सूख जाने पर उसमें रहने वाले प्राणियों को कष्ट होने लगता है।
 
‘Therefore, by attacking him and interrupting his coronation, the people have suffered great pain in the same way as the creatures living in a pond begin to suffer when the water in it dries up in summer.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd