श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 33: सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का दुःखी नगरवासियों के मुख से तरह की बातें सुनते हुए पिता के दर्शन के लिये कैकेयी के महल में जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.33.10 
अद्य नूनं दशरथ: सत्त्वमाविश्य भाषते।
नहि राजा प्रियं पुत्रं विवासयितुमर्हति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'राजा दशरथ आज अवश्य ही किसी दुष्टात्मा के वशीभूत होकर कोई अनुचित बात कह रहे हैं; क्योंकि कोई भी राजा अपने स्वाभाविक अवस्था में रहकर अपने प्रिय पुत्र को घर से नहीं निकाल सकता।॥10॥
 
'King Dasharath is surely saying something inappropriate today under the influence of some evil spirit; because no king living in his natural state can expel his beloved son from the house.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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