श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.32.9 
पर्यङ्कमग्र्यास्तरणं नानारत्नविभूषितम्।
तमपीच्छति वैदेही प्रतिष्ठापयितुं त्वयि॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'जो शय्या उत्तम बिछौने से सुसज्जित है और नाना प्रकार के रत्नों से विभूषित है, उसे भी विदेहनन्दिनी सीता तुम्हारे घर भेजना चाहती हैं।॥9॥
 
'The bed which is fitted with the finest beddings and decorated with various kinds of gems, Videhanandini Sita wants to send that too to your house.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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