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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.32.8 
अङ्गदानि च चित्राणि केयूराणि शुभानि च।
प्रयच्छति सखी तुभ्यं भार्यायै गच्छती वनम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हारी पत्नी की सखी सीता, जो वन को जा रही है, वह भी तुम्हारी पत्नी के लिए एक अनोखी पायल और एक सुन्दर कंगन देना चाहती है। 8.
 
'Sita, the friend of your wife who is leaving for the forest, also wants to give you a unique anklet and a beautiful bracelet for your wife. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)