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ramayan 2.32.6-7: इसके बाद सीता से प्रेरित होकर श्रीराम ने सुयज्ञ से कहा - 'सौम्य! तुम्हारी पत्नी की सखी सीता तुम्हें अपना हार, स्वर्ण-सूत्र और करधनी देना चाहती है। ये वस्तुएँ अपनी पत्नी के लिए ले जाओ।'   |   ramayan सर्ग 2.32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  2.32.6-7 
सुयज्ञं स तदोवाच राम: सीताप्रचोदित:॥ ६॥
हारं च हेमसूत्रं च भार्यायै सौम्य हारय।
रशनां चाथ सा सीता दातुमिच्छति ते सखी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद सीता से प्रेरित होकर श्रीराम ने सुयज्ञ से कहा - 'सौम्य! तुम्हारी पत्नी की सखी सीता तुम्हें अपना हार, स्वर्ण-सूत्र और करधनी देना चाहती है। ये वस्तुएँ अपनी पत्नी के लिए ले जाओ।'
 
After this, inspired by Sita, Shri Ram said to Suyagya - 'Soumya! Your wife's friend Sita wants to give you her necklace, golden thread and belt. Take these things for your wife. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)