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ramayan 2.32.42: मैं तुमसे सच कह रहा हूँ, इसमें तुम्हें संकोच करने का कोई कारण नहीं है। मेरे पास जो भी धन है, वह ब्राह्मणों के लिए ही है। तुम जैसे ब्राह्मणों को शास्त्रविधि अनुसार दान देकर मैंने जो धन कमाया है, उससे मेरा यश बढ़ेगा।   |   ramayan सर्ग 2.32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.32.42 
ब्रवीमि सत्येन न ते स्म यन्त्रणां
धनं हि यद्यन्मम विप्रकारणात्।
भवत्सु सम्यक्प्रतिपादनेन
मयार्जितं चैव यशस्करं भवेत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
मैं तुमसे सच कह रहा हूँ, इसमें तुम्हें संकोच करने का कोई कारण नहीं है। मेरे पास जो भी धन है, वह ब्राह्मणों के लिए ही है। तुम जैसे ब्राह्मणों को शास्त्रविधि अनुसार दान देकर मैंने जो धन कमाया है, उससे मेरा यश बढ़ेगा।
 
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 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)