vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण
»
श्लोक 37
श्लोक
2.32.37
स शाटीं परित: कटॺां सम्भ्रान्त: परिवेष्टॺ ताम्।
आविध्य दण्डं चिक्षेप सर्वप्राणेन वेगत:॥ ३७॥
अनुवाद
यह सुनते ही उसने जल्दी से अपनी धोती का सिरा कमर पर लपेटा और पूरी ताकत लगाकर लाठी को जोर से घुमाया और फेंक दिया।
On hearing this he quickly wrapped the end of his dhoti around his waist and using all his strength he swung the stick with great force and threw it.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd