Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.32.35-36: तब श्री राम ने परिहासपूर्वक कहा - 'ब्रह्मन्! मेरे पास असंख्य गौएँ हैं, मैंने अभी तक उनमें से एक हजार भी किसी को दान नहीं की हैं। तुम जहाँ तक अपनी लाठी फेंक सकोगे, वहाँ तक तुम्हें सारी गौएँ मिल जाएँगी।'॥36॥ | ramayan सर्ग 2.32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमुवाच ततो राम: परिहाससमन्वितम्॥ ३५॥
गवां सहस्रमप्येकं न च विश्राणितं मया।
परिक्षिपसि दण्डेन यावत्तावदवाप्स्यसे॥ ३६॥
अनुवाद
तब श्री राम ने परिहासपूर्वक कहा - 'ब्रह्मन्! मेरे पास असंख्य गौएँ हैं, मैंने अभी तक उनमें से एक हजार भी किसी को दान नहीं की हैं। तुम जहाँ तक अपनी लाठी फेंक सकोगे, वहाँ तक तुम्हें सारी गौएँ मिल जाएँगी।'॥36॥
Then Shri Ram said jokingly - 'Brahman! I have innumerable cows, I have not yet donated even one thousand of them to anyone. You will get all the cows as far as you can throw your stick.'॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥