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ramayan 2.32.33: भृगु और अंगिरा के समान तेजस्वी त्रिजटा भीड़ में से होकर श्री रामभवन की पाँचवीं मंजिल पर चली गईं, परंतु किसी ने उन्हें नहीं रोका॥33॥   |   ramayan सर्ग 2.32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.32.33 
भृग्वङ्गिर:समं दीप्त्या त्रिजटं जनसंसदि।
आपञ्चमाया: कक्ष्याया नैतं कश्चिदवारयत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भृगु और अंगिरा के समान तेजस्वी त्रिजटा भीड़ में से होकर श्री रामभवन की पाँचवीं मंजिल पर चली गईं, परंतु किसी ने उन्हें नहीं रोका॥33॥
 
Trijata, as bright as Bhrigu and Angira, passed through the crowd and went to the fifth floor of Shri Ram Bhawan, but no one stopped him. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)