श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.32.22 
अम्बा यथा नो नन्देच्च कौसल्या मम दक्षिणाम्।
तथा द्विजातींस्तान् सर्वाल्लँक्ष्मणार्चय सर्वश:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'लक्ष्मण! जिस प्रकार मेरी माता कौसल्या उन समस्त ब्रह्मचारी ब्राह्मणों को मेरे द्वारा दी गई दक्षिणा देखकर प्रसन्न हुईं, उसी प्रकार तुम भी सब प्रकार से उनका पूजन करो।'॥22॥
 
'Lakshmana! Just as my mother Kausalya became happy on seeing the dakshina given by me to all those celibate Brahmins, in the same way you should worship them in every possible way.'॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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