श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  2.32.17-18h 
सूतश्चित्ररथश्चार्य: सचिव: सुचिरोषित:।
तोषयैनं महार्हैश्च रत्नैर्वस्त्रैर्धनैस्तथा॥ १७॥
पशुकाभिश्च सर्वाभिर्गवां दशशतेन च।
 
 
अनुवाद
चित्ररथ नामक एक सारथी भी उत्तम सचिव है। वह बहुत समय से यहाँ राजपरिवार की सेवा कर रहा है। उसे बहुमूल्य रत्न, वस्त्र और धन देकर संतुष्ट करो। साथ ही, उसे अज आदि श्रेष्ठ पशु और एक हजार गौएँ देकर भी पूर्णतः संतुष्ट करो॥17 1/2॥
 
‘A charioteer named Chitrarath is also an excellent secretary. He has been serving the royal family here for a long time. Satisfy him by giving him precious gems, clothes and money. Also, satisfy him completely by offering him all the best animals like Aja etc. and one thousand cows.॥ 17 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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