Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.32.10: 'हे ब्राह्मण! मैं आपको शत्रुंजय नामक हाथी, जो मेरे मामा ने मुझे उपहार में दिया था, तथा एक हजार स्वर्ण मुद्राओं सहित भेंट करता हूँ।'   |   ramayan सर्ग 2.32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 32: लक्ष्मण सहित श्रीराम द्वारा ब्राह्मणों, ब्रह्मचारियों, सेवकों, त्रिजट ब्राह्मण और सुहृज्जनों को धन का वितरण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.32.10 
नाग: शत्रुंजयो नाम मातुलोऽयं ददौ मम।
तं ते निष्कसहस्रेण ददामि द्विजपुङ्गव॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'हे ब्राह्मण! मैं आपको शत्रुंजय नामक हाथी, जो मेरे मामा ने मुझे उपहार में दिया था, तथा एक हजार स्वर्ण मुद्राओं सहित भेंट करता हूँ।'
 
'O Brahmin! I offer you the elephant named Shatrunjaya, which my maternal uncle had gifted me, along with a thousand gold coins.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)