श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.30.46 
अनुकूलं तु सा भर्तुर्ज्ञात्वा गमनमात्मन:।
क्षिप्रं प्रमुदिता देवी दातुमेव प्रचक्रमे॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
‘मेरे स्वामी ने मेरे वन जाने की स्वीकृति दे दी है, मेरा वन जाना उन्हें स्वीकृत हो गया है’, ऐसा जानकर देवी सीता अत्यन्त प्रसन्न हुईं और शीघ्रतापूर्वक सम्पूर्ण वस्तुएँ दान करने लगीं॥ 46॥
 
Knowing that ‘My lord has approved of my going to the forest, my going to the forest has been granted to him’, goddess Sita became very happy and quickly started donating all the things.॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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