|
| |
| |
श्लोक 2.30.14  |
शाद्वलेषु यदा शिश्ये वनान्तर्वनगोचरा।
कुथास्तरणयुक्तेषु किं स्यात् सुखतरं तत:॥ १४॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| जब मैं वन में रहूँगा, तब तुम्हारे साथ घास पर सोऊँगा। रंग-बिरंगे कालीनों और कोमल बिछौने पर सोने से बढ़कर और क्या सुख हो सकता है?॥14॥ |
| |
| ‘When I am in the forest, I will sleep with you on the grass. Can there be more happiness than sleeping on beds with colourful carpets and soft bedding?॥ 14॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|