श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 30: सीता का वन में चलने के लिये अधिकआग्रह, विलाप और घबराहट देखकर श्रीराम का उन्हें साथ ले चलने की स्वीकृति देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.30.14 
शाद्वलेषु यदा शिश्ये वनान्तर्वनगोचरा।
कुथास्तरणयुक्तेषु किं स्यात् सुखतरं तत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब मैं वन में रहूँगा, तब तुम्हारे साथ घास पर सोऊँगा। रंग-बिरंगे कालीनों और कोमल बिछौने पर सोने से बढ़कर और क्या सुख हो सकता है?॥14॥
 
‘When I am in the forest, I will sleep with you on the grass. Can there be more happiness than sleeping on beds with colourful carpets and soft bedding?॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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