श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 3: राज्याभिषेक की तैयारी , राजा दशरथ का श्रीराम को राजनीति की बातें बताना  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  2.3.47-48h 
सा हिरण्यं च गाश्चैव रत्नानि विविधानि च॥ ४७॥
व्यादिदेश प्रियाख्येभ्य: कौसल्या प्रमदोत्तमा।
 
 
अनुवाद
स्त्रियों में श्रेष्ठ कौशल्या ने उस प्रिय संवाद को सुनाने वाली सखियों को नाना प्रकार के रत्न, सुवर्ण और गौएँ पुरस्कारस्वरूप दीं ॥47 1/2॥
 
Kausalya, the best among women, gave various types of gems, gold and cows as rewards to those friends who narrated that beloved dialogue. 47 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)