vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 3: राज्याभिषेक की तैयारी , राजा दशरथ का श्रीराम को राजनीति की बातें बताना
»
श्लोक 47-48h
श्लोक
2.3.47-48h
सा हिरण्यं च गाश्चैव रत्नानि विविधानि च॥ ४७॥
व्यादिदेश प्रियाख्येभ्य: कौसल्या प्रमदोत्तमा।
अनुवाद
स्त्रियों में श्रेष्ठ कौशल्या ने उस प्रिय संवाद को सुनाने वाली सखियों को नाना प्रकार के रत्न, सुवर्ण और गौएँ पुरस्कारस्वरूप दीं ॥47 1/2॥
Kausalya, the best among women, gave various types of gems, gold and cows as rewards to those friends who narrated that beloved dialogue. 47 1/2॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd