श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 3: राज्याभिषेक की तैयारी , राजा दशरथ का श्रीराम को राजनीति की बातें बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.3.4 
चैत्र: श्रीमानयं मास: पुण्य: पुष्पितकानन:।
यौवराज्याय रामस्य सर्वमेवोपकल्प्यताम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'यह चैत्र मास अत्यंत सुंदर एवं पवित्र है। इस मास में समस्त वन-उपवन पूर्णरूपेण खिले रहते हैं। अतः तुम लोग इस समय भगवान राम का युवराज पद पर अभिषेक करने हेतु समस्त सामग्री एकत्रित करो।'॥4॥
 
'This month of Chaitra is very beautiful and holy. All the forests and groves are in full bloom in this month. Therefore, you all should collect all the materials for anointing Lord Rama as the crown prince at this time.'॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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