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श्लोक  2.3.37-38h 
तं पश्यमानो नृपतिस्तुतोष प्रियमात्मजम्॥ ३७॥
अलंकृतमिवात्मानमादर्शतलसंस्थितम्।
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार सुन्दर वस्त्र पहने हुए मनुष्य को दर्पण में अपना प्रतिबिम्ब देखकर बड़ी प्रसन्नता होती है, उसी प्रकार राजा अपने प्रिय पुत्र श्री राम को देखकर बहुत प्रसन्न हुए।
 
Just as a person gets great satisfaction on seeing his own reflection in a mirror, dressed in beautiful clothes, similarly the king became very happy on seeing his beloved son, Shri Ram. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)