Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.3.26-27: राजा दशरथ महल के मध्य में बैठे हुए मरुतों में देवराज इन्द्र के समान शोभा पा रहे थे; वहाँ से उन्होंने अपने पुत्र श्री राम को, जो गन्धर्वराज के समान तेजस्वी थे और जिनका पराक्रम संसार में विख्यात था, अपनी ओर आते देखा। | ramayan सर्ग 2.3: राज्याभिषेक की तैयारी , राजा दशरथ का श्रीराम को राजनीति की बातें बताना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेषां मध्ये स राजर्षिर्मरुतामिव वासव:॥ २६॥
प्रासादस्थो दशरथो ददर्शायान्तमात्मजम्।
गन्धर्वराजप्रतिमं लोके विख्यातपौरुषम्॥ २७॥
अनुवाद
राजा दशरथ महल के मध्य में बैठे हुए मरुतों में देवराज इन्द्र के समान शोभा पा रहे थे; वहाँ से उन्होंने अपने पुत्र श्री राम को, जो गन्धर्वराज के समान तेजस्वी थे और जिनका पराक्रम संसार में विख्यात था, अपनी ओर आते देखा।
King Dasharatha, seated in the middle of the palace, looked like the king of gods Indra among the Maruts; from there he saw his son Sri Rama, who was as radiant as the king of Gandharvas and whose valour was renowned throughout the world, coming towards him. 26-27.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥