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श्लोक 15
श्लोक
2.3.15
सत्कृत्य द्विजमुख्यानां श्व: प्रभाते प्रदीयताम्।
घृतं दधि च लाजाश्च दक्षिणाश्चापि पुष्कला:॥ १५॥
अनुवाद
‘कल प्रातःकाल श्रेष्ठ ब्राह्मणों का स्वागत करो और उन्हें भोजन कराओ; साथ ही उन्हें घी, दही, मुरमुरे और पर्याप्त दक्षिणा दो।॥15॥
‘Tomorrow morning welcome the best of the brahmins and offer them that food; also give them ghee, curd, puffed rice and ample dakshina.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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