श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 29: सीता का श्रीराम के समक्ष उनके साथ अपने वनगमन का औचित्य बताना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.29.8 
अथापि च महाप्राज्ञ ब्राह्मणानां मया श्रुतम्।
पुरा पितृगृहे सत्यं वस्तव्यं किल मे वने॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे महर्षि! यद्यपि वन पाप और दुःखों से भरा हुआ है, तथापि मैंने अपने पिता के घर रहते हुए ब्राह्मणों से सुना था कि 'मुझे अवश्य ही वन में रहना पड़ेगा।' यह वचन मेरे जीवन भर सत्य रहेगा।॥8॥
 
'O great sage! Although the forest is full of evils and misery, yet while staying at my father's house I had heard from the Brahmins that 'I will surely have to live in the forest'. This will remain true throughout my life.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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