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श्लोक 2.29.5  |
त्वया च सह गन्तव्यं मया गुरुजनाज्ञया।
त्वद्वियोगेन मे राम त्यक्तव्यमिह जीवितम्॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| 'श्रीराम! अपने ज्येष्ठों की आज्ञा से मुझे अवश्य ही आपके साथ चलना चाहिए; क्योंकि यदि मैं आपसे वियोग में यहीं प्राण त्याग दूँगा॥5॥ |
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| 'Shri Ram! By the order of my elders I must certainly come with you; because if I am separated from you I will give up my life here.॥ 5॥ |
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