श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 29: सीता का श्रीराम के समक्ष उनके साथ अपने वनगमन का औचित्य बताना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.29.21 
यदि मां दु:खितामेवं वनं नेतुं न चेच्छसि।
विषमग्निं जलं वाहमास्थास्ये मृत्युकारणात्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यदि आप मुझ दासी को, जो इस प्रकार कष्ट में पड़ी है, अपने साथ वन में ले जाने को तैयार नहीं हैं, तो मैं या तो विष खा लूँगी, या अग्नि में कूद जाऊँगी, या जल में डूबकर मर जाऊँगी॥ 21॥
 
'If you are not willing to take me, your maidservant, who is in such distress, with you to the forest, then I will either consume poison, jump into a fire, or drown myself in water to die.'॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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