श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 29: सीता का श्रीराम के समक्ष उनके साथ अपने वनगमन का औचित्य बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.29.17 
प्रेत्यभावे हि कल्याण: संगमो मे सदा त्वया।
श्रुतिर्हि श्रूयते पुण्या ब्राह्मणानां यशस्विनाम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘आपका अनुसरण करके मैं परलोक में भी कल्याण प्राप्त करूँगा और सदैव आपके साथ ही युक्त रहूँगा।’ इस विषय में श्रेष्ठ ब्राह्मणों के मुख से एक पवित्र श्रुति सुनी जाती है (जो इस प्रकार है—)॥17॥
 
‘By following you I will attain welfare in the next world also and I will always remain in union with you. In this regard a sacred Shruti is heard from the mouth of illustrious Brahmins (which is as follows—)॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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