| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 29: सीता का श्रीराम के समक्ष उनके साथ अपने वनगमन का औचित्य बताना » श्लोक 10 |
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| | | | श्लोक 2.29.10  | आदेशो वनवासस्य प्राप्तव्य: स मया किल।
सा त्वया सह भर्त्राहं यास्यामि प्रिय नान्यथा॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | 'प्रियतम! मैंने ब्राह्मण से यह सीखा है कि मुझे एक-न-एक दिन वन में रहने का आदेश पूरा करना ही होगा, इसे किसी भी प्रकार से टाला नहीं जा सकता। अतः मैं आपके साथ वन में अवश्य चलूँगा, हे प्रभु॥ 10॥ | | | | 'Dearest! I have learnt from the Brahmin that I will have to fulfil the order of living in the forest one day or the other, this cannot be reversed in any way. Therefore, I will surely accompany you to the forest, my lord.॥ 10॥ | | ✨ ai-generated | | |
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