श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 29: सीता का श्रीराम के समक्ष उनके साथ अपने वनगमन का औचित्य बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.29.1 
एतत् तु वचनं श्रुत्वा सीता रामस्य दु:खिता।
प्रसक्ताश्रुमुखी मन्दमिदं वचनमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के मुख से ये वचन सुनकर सीता को बड़ा दुःख हुआ, उनके मुख से आँसू बहने लगे और वे धीरे-धीरे इस प्रकार कहने लगीं-॥1॥
 
Sita felt very sad on hearing these words from Sri Rama. Tears started flowing from her face and she slowly began to say thus -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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