श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम का वनवास के कष्ट का वर्णन करते हुए सीता को वहाँ चलने से मना करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.28.7 
गिरिनिर्झरसम्भूता गिरिनिर्दरिवासिनाम्।
सिंहानां निनदा दु:खा: श्रोतुं दु:खमतो वनम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘पहाड़ों से गिरते झरनों की ध्वनि सुनकर उन पहाड़ों की गुफाओं में रहने वाले सिंह दहाड़ने लगते हैं। उनकी दहाड़ सुनने में बड़ी कष्टदायक लगती है, इसलिए वह वन शोक से भर जाता है।॥7॥
 
‘Hearing the sound of waterfalls falling from the mountains, the lions living in the caves of those mountains start roaring. Their roar seems very painful to hear, hence the forest is full of sorrow.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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