श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम का वनवास के कष्ट का वर्णन करते हुए सीता को वहाँ चलने से मना करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.28.23 
कायक्लेशाश्च बहवो भयानि विविधानि च।
अरण्यवासे वसतो दु:खमेव सदा वनम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'वन में रहने वाले मनुष्य को अनेक शारीरिक कष्टों और नाना प्रकार के भयों का सामना करना पड़ता है; इसलिए वन सदैव दुःख का स्थान है॥ 23॥
 
'A man living in a forest has to face many physical troubles and various kinds of fears; hence the forest is always a place of misery.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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