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श्लोक 2.28.23  |
कायक्लेशाश्च बहवो भयानि विविधानि च।
अरण्यवासे वसतो दु:खमेव सदा वनम्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| 'वन में रहने वाले मनुष्य को अनेक शारीरिक कष्टों और नाना प्रकार के भयों का सामना करना पड़ता है; इसलिए वन सदैव दुःख का स्थान है॥ 23॥ |
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| 'A man living in a forest has to face many physical troubles and various kinds of fears; hence the forest is always a place of misery.॥ 23॥ |
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