श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम का वनवास के कष्ट का वर्णन करते हुए सीता को वहाँ चलने से मना करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.28.22 
द्रुमा: कण्टकिनश्चैव कुशा: काशाश्च भामिनि।
वने व्याकुलशाखाग्रास्तेन दु:खमतो वनम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
भामिनी! वन में कुश और कास नामक काँटेदार वृक्ष हैं, जिनकी शाखाएँ सब ओर फैली हुई हैं; इसलिए वह वन विशेष कष्टदायक है॥ 22॥
 
‘Bhamini! In the forest there are thorny trees, Kush and Kas, whose branches are spread in all directions; therefore the forest is especially troublesome.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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