श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम का वनवास के कष्ट का वर्णन करते हुए सीता को वहाँ चलने से मना करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.28.21 
पतङ्गा वृश्चिका: कीटा दंशाश्च मशकै: सह।
बाधन्ते नित्यमबले सर्वं दु:खमतो वनम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे अभागे! वहाँ पतंगे, बिच्छू, कीड़े, मक्खियाँ और मच्छर सदैव उत्पात मचाते रहते हैं; इसलिए सारा वन दुःख से भरा हुआ है॥ 21॥
 
‘Wretched one! Moths, scorpions, insects, flies and mosquitoes are always causing trouble there; hence the entire forest is full of misery.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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