श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम का वनवास के कष्ट का वर्णन करते हुए सीता को वहाँ चलने से मना करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.28.19 
सरीसृपाश्च बहवो बहुरूपाश्च भामिनि।
चरन्ति पथि ते दर्पात् ततो दु:खतरं वनम्॥१९॥
 
 
अनुवाद
भामिनी! यहाँ नाना प्रकार के पर्वतीय सर्प हैं, जो अभिमानपूर्वक मार्ग के बीच में विचरण करते हैं; इसलिए यह वन अत्यंत दुःखदायी है॥19॥
 
'Bhamini! There are many mountain serpents of many kinds, who roam about in the middle of the path out of pride; therefore the forest is extremely painful.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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